करें चरित्र पवित्र!!!

रखे तो कृष्ण ने भी कई वचन |
कुछ इस जनम, कुछ उस जनम ||
अहो मनुष्य-सौगंध का ये चरम |
बने भीष्म प्रतिज्ञा के विशेषण ||

जब जिसने किया प्रभु-सुमिरन |
कामना पूर्ण करते थे भगवन ||
कर दिया कवच-कुंडल अर्पण |
और दानवीर कहलाया कर्ण ||

देवों को चुनौतियाँ देने वाला |
प्राणों को दान समझने वाला ||
वो मनुष्य आज सो बैठा है |
अपना चरित्र खो बैठा है ||

जब भीष्म कर्ण से हो चरित्र |
तब घटती है घटना विचित्र ||
कर जोड़ खड़े होते हैं राघव |
वाह रे चरित्र, वाह रे मानव ||

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