करें चरित्र पवित्र!!!

रखे तो कृष्ण ने भी कई वचन |
कुछ इस जनम, कुछ उस जनम ||
अहो मनुष्य-सौगंध का ये चरम |
बने भीष्म प्रतिज्ञा के विशेषण ||

जब जिसने किया प्रभु-सुमिरन |
कामना पूर्ण करते थे भगवन ||
कर दिया कवच-कुंडल अर्पण |
और दानवीर कहलाया कर्ण ||

देवों को चुनौतियाँ देने वाला |
प्राणों को दान समझने वाला ||
वो मनुष्य आज सो बैठा है |
अपना चरित्र खो बैठा है ||

जब भीष्म कर्ण से हो चरित्र |
तब घटती है घटना विचित्र ||
कर जोड़ खड़े होते हैं राघव |
वाह रे चरित्र, वाह रे मानव ||

यादों की खेती..

ये दिल जो तनहा होता है, तेरे ही ख़याल आते हैं…

सो चुके यादों के सागर में फिर नए उबाल आते हैं…

आज कुछ ऐसा ही हुआ, सोचा कुछ पुराने पल फिर बिखेर दूं…

वक़्त ने जो सिल दिए हैं घाव, एक बार फिर उन्हें उधेड़ दूं…

क्यूंकि जिन नाखूनों के ये ज़ख्म हैं…

उन्ही हथेलियों की गोद में आज भी सोया करता हूँ…

कल के सपनों में ही, कल के बीज बोया करता हूँ…

तुझे तो खो चुका, तेरी यादों को खोने से बहुत डरता हूँ…

इसलिए वक़्त निकाल के, तनहा रह लिया करता हूँ….

शर्त [Shart]

थी एक ही ख्वाइश जिंदगी में, कि खुशियाँ कभी तेरी कम न हो…

खुदा ने मंज़ूर तो कर ली ये गुजारिश मेरी…

एक शर्त खुदा ने भी रख्खा, कि उन खुशियों में शामिल हम न हो..

ज़िन्दगी तेरी ज़िन्दगी में शामिल कर चुका था मैं…

क्यूँ भटक कर उस खुदा के दर पे चला गया…

कब से तो तुझे अपना खुदा कर चुका था मैं…