रखे तो कृष्ण ने भी कई वचन |
कुछ इस जनम, कुछ उस जनम ||
अहो मनुष्य-सौगंध का ये चरम |
बने भीष्म प्रतिज्ञा के विशेषण ||
जब जिसने किया प्रभु-सुमिरन |
कामना पूर्ण करते थे भगवन ||
कर दिया कवच-कुंडल अर्पण |
और दानवीर कहलाया कर्ण ||
देवों को चुनौतियाँ देने वाला |
प्राणों को दान समझने वाला ||
वो मनुष्य आज सो बैठा है |
अपना चरित्र खो बैठा है ||